विधि संवाददाता, अप्रैल 23 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में नाबालिग बच्चे की कस्टडी उसकी मां को देते हुए कहा कि बच्चे के भविष्य और समग्र विकास को सर्वोपरि माना जाएगा। न्यायमूर्ति संदीप जैन ने यह आदेश डॉ भावना सिंह की बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में आरोप लगाया गया कि बच्चे के पिता शराब के आदी हैं, घरेलू हिंसा का इतिहास है और आर्थिक रूप से भी स्थिर नहीं हैं, इसलिए बच्चे का सही पालन-पोषण उनके पास संभव नहीं है। माता ने बताया कि उन्होंने अपने 10 वर्षीय बेटे का दाखिला शिमला के प्रतिष्ठित स्कूल में कक्षा 5 के लिए करा दिया है और इसके लिए लगभग 17 लाख रुपये खर्च किए हैं। वहीं, पिता की ओर से कहा गया कि बच्चा उनके साथ मेरठ में रह रहा है और वहीं पढ़ाई कर रहा है। साथ ही बच्चे ने खुद पिता के स...