बीटेक में फर्स्ट डिवीजन, 500 कंपनियों में अप्लाई... अब रैपिडो चलाने को मजबूर नौजवान
नई दिल्ली, जुलाई 4 -- जब कोई युवा इंजीनियरिंग की डिग्री लेता है, तो उसकी आंखों में एक शानदार भविष्य के सपने पलने लगते हैं। एक अच्छी नौकरी, बढ़िया पैकेज और जिंदगी में कुछ कर गुजरने का जुनून... लेकिन असल जिंदगी की सच्चाई कई बार इन किताबी सपनों से कोसों दूर होती है। आज का जॉब मार्केट नए ग्रेजुएट्स को एक ऐसा तगड़ा झटका दे रहा है, जहां अच्छे नंबर और शानदार डिग्रियां भी पहली नौकरी की कोई गारंटी नहीं रह गई हैं। जरा सोचिए, उस नौजवान के दिल पर क्या बीतती होगी जो पूरी उम्मीद के साथ सैकड़ों कंपनियों के दरवाजे खटखटाता है लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं आता और सिर्फ एक खामोशी छा जाती है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इन दिनों एक ऐसी ही कहानी तेजी से वायरल हो रही है, जिसने इंटरनेट पर एक नई बहस छेड़ दी है। यह कहानी एक ऐसे रैपिडो राइडर की है, जिसने कंप्यूटर...
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