हिन्दुस्तान ब्यूरो, दिसम्बर 3 -- बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को मिले प्रचंड जनादेश के बाद भाजपा के कोटे में फिर से स्पीकर का पद आना राजनीतिक रूप से पार्टी के लिए अहम माना जा रहा है। सदन के अंदर एनडीए के घटक दलों के बीच संतुलन बनाने और विपक्ष को आक्रामक होने से रोकने में भी अध्यक्ष की भूमिका इस बार अधिक प्रभावी होगी। भाजपा ने लगातार दूसरी बार विधानसभा अध्यक्ष का पद प्राप्त किया है। भाजपा कोटे से ही विधान परिषद के सभापति होने के कारण यह संभावना जताई जा रही थी कि यह पद जदयू के पास जा सकता है। लेकिन, भाजपा पहले दिन से ही इस पद को लेकर गंभीर थी। वह जानती है कि सत्ता संतुलन के लिए इस पद के क्या मायने हैं?सहमति का रास्ता निकालने की चुनौती 243 सदस्यीय सदन में एनडीए को 202 सीटें मिली हैं जबकि महागठबंधन के पास सिर्फ 35 विधायक हैं। भविष्य में सिय...
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