वाराणसी, मई 9 -- वाराणसी। नदी रेत संग दिखती पूरब, काशी पश्चिम ओर

कार्यक्रम का विवरण बीच धार पर तेज हवा में, थामी सुर की डोर इन मिसरों में कैद हैं साढ़े तीन घंटे की अविस्मरणीय स्मृतियां जो काशी के सुधिजनों ने शुक्रवार की शाम बटोरीं। अवसर था पद्मविभूषण गिरिजा देवी की 97वीं जयंती पर 'सांझ प्रणामी' का। छह साल पहले गिरिजा देवी के नाटीइमली स्थित आवास के सामने के पार्क से शुरू होकर गत वर्ष बजड़े से होते प्रणामी ने अत्याधुनिक क्रूज पर पहली बार जगह बनाई।

संगीत का अनुभव शुक्रवार की शाम 05:22 बजे संत रविदास घाट से जब क्रूज ने घाट छोड़ा तो पूर्वाभिमुख संगीत रसिक उक्त दो मिसरों के अनुरूप माहौल जी रहे थे। अस्सी से वरुणा संगम तक पहला मिसरा साथ चलता रहा। रेत वही, गंगा वही मगर दक्षिण की ओर छूटती हर धारा के साथ मंच के पृष्ठ में दृश्य का परिवर्तन होता रहा...