हिन्दुस्तान ब्यूरो, मार्च 9 -- बिहार में हर साल तीन से चार हजार बच्चे लापता हो रहे हैं। बीते कुछ वर्षों के दौरान सालाना औसतन 12 से 14 हजार गुमशुदगी के मामले दर्ज हुए, जिनमें बमुश्किल दो तिहाई बच्चे ही बरामद हो सके हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ 2025 में राज्यभर में बच्चों की गुमशुदगी के दर्ज हुए 14699 मामलों में उस साल 6927 बच्चों की बरामदगी संभव नहीं हो सकी थी। पुलिस को आशंका है कि गायब हो रहे बच्चे ह्यूमन ट्रैफिकिंग (मानव तस्करी) के शिकार हो रहे हैं। उनको जबरन भिक्षावृति, बाल श्रम, वेश्यावृति आदि अनैतिक कार्यों में धकेला जा रहा है। 2013 के बाद चार गुणा तक बढ़ गए गुमशुदगी के आंकड़े : पुलिस सूत्रों के मुताबिक बिहार पुलिस ने गुमशुदगी के मामलों में 24 घंटे के अंदर बरामदगी नहीं होने पर अपहरण की प्राथमिकी दर्ज कराना अनिवार्य कर दिया है।...