पटना, अक्टूबर 1 -- जून में चुनाव आयोग (ईसी) ने बिहार की मतदाता सूची के लिए विशेष गहन संशोधन (SIR) का आदेश दिया, जिसमें मतदाताओं को पात्रता साबित करने के लिए 11 दस्तावेजों में से एक प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया। यह कदम अभूतपूर्व था और इसे नागरिकता जांच से जोड़कर देखा गया, जिसके कारण इसकी आलोचना हुई और सुप्रीम कोर्ट में चुनौतियां पेश की गईं। हालांकि, तीन महीने बाद मंगलवार को समाप्त हुए इस अभियान का स्वरूप सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप और जमीनी स्तर से प्राप्त फीडबैक के कारण काफी बदल गया।शुरुआती शर्तें और विवाद 24 जून के आदेश के तहत, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में शामिल होने के लिए दस्तावेजी सबूत को अनिवार्य किया। लेकिन आधार, राशन कार्ड, और यहां तक कि आयोग का अपना मतदाता फोटो पहचान पत्र (ईपीआईसी) को स्वीकार्य दस्तावेजों की सूची से बाहर रखा गय...
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