भागलपुर, फरवरी 25 -- भागलपुर, मुख्य संवाददाता। पलायन की फैक्ट्री कहा जाने वाला बिहार अब नियोक्ता प्रदेश बनता जा रहा है। प्रशासन, विधि, शिक्षा, यांत्रिकी आदि में रोजगार पाने से इतर रेहड़ी-पटरी पर दुकान चलाने वाले खुदरा व्यापारियों के लिए भी बड़ा हब बन गया है। कोराना काल के बाद से बिहार एक बड़े उपभोक्ता बाजार के रूप में उभरा है। जहां कृषि-आधारित उद्योगों, फल-सब्जी प्रसंस्करण और खुदरा व्यापार में बाहर के राज्यों जैसे- बंगाल, यूपी, राजस्थान, कश्मीर, सिक्किम आदि के निवेशकों की खासी रुचि बढ़ी है। पिछले पांच साल में दूसरे राज्यों के उत्पाद और व्यापारी यहां के बाजारों पर धीरे-धीरे हावी हो रहे हैं। प्रति माह रेहड़ी पर करोड़ों का व्यापार सज रहा है। बदलते बिहार पर श्रम संसाधन विभाग रेहड़ी बाजार का अध्ययन कर रहा है। प्रारंभिक अध्ययन में पाया गया कि भ...
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