पटना, नवम्बर 7 -- बिहार में चौबीस तरह के लोक कलाओं में सक्रिय एक लाख लोक-कलाकारों में से 15 को भारत सरकार ने पद्मश्री से अलंकृत किया है। इनमें से नौ केवल मिथिला चित्रकला से संबंधित कलाकार हैं। बिहार की लोक कलाओं को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने के पीछे एक लंबा संघर्ष है। यह बातें बिहार संग्रहालय के अपर निदेशक अशोक सिन्हा ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में लोक कलाओं पर व्याख्यान देते हुए कही। संग्रहालय में 5 से 30 नवंबर तक 'सीता' नाम से बिहार की लोक कलाओं की भव्य प्रदर्शनी आयोजित की गई है, जिसमें बिहार की लोक कलाओं की पृष्ठभूमि पर विस्तार से चर्चा करते हुए डॉ. सिन्हा ने कहा कि वर्ष 1097 में कर्नाटक के राजा नान्यदेव ने मिथिला पर अधिकार स्थापित किया। वहीं से आये कर्ण-कायस्थों और ब्राह्मणों का लोक कलाओं पर एकाधिकार रहा। बाद में दलितों क...
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