समस्तीपुर, मार्च 8 -- आजादी के बाद 1955 में ग्रामीण क्षेत्र में खुला प्रदेश का इकलौता बिरौली कॉलेज आज व्याख्याताओं, चहारदीवारी और अन्य समुचित संसाधन का अभाव झेल रहा है। स्नातक के करीब 28 सौ छात्रों पर महज (संविदा पर कार्यरत) दो व्याख्याताओं का होना शिक्षा व्यवस्था लचर व्यवस्था को दर्शाता है। यह हालात करीब चार वर्षों से है। पूर्व में कार्यरत व्याख्याता अब धीरे-धीरे सेवानिवृत हो चुके हैं। अब साइंस और आर्ट्स दोनों में महज दो व्याख्याता कार्य कर रहे हैं। विज्ञान विभाग की कमान डॉ.गीतिका संभालती हैं तो आर्ट्स में राजेश कुमार बेहतर शिक्षा देने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में गुणवत्तायुक्त शिक्षा व्यवस्था के संबंध कुछ कहना बेमानी होगी। दरअसल, वर्ष 1955 में स्थापित यह संस्थान 30 बीघे में संचालित है। भवन है पर शिक्षक का अभाव है। मैदान है लेकिन चहारदी...
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