जमशेदपुर, अप्रैल 1 -- अटूट दृढ़ संकल्प और सही मार्गदर्शन मिल जाए तो सुदूर जंगलों से निकलकर भी सफलता के झंडे गाड़े जा सकते हैं। पूर्वी सिंहभूम के छोटाबांकी गांव की बालिका बिरहोर ने इसे सच कर दिखाया है। जनजातीय समूह बिरहोर से आने वाली बालिका अब बेंगलुरू के प्रतिष्ठित नारायणा हृदयालय में बतौर स्टाफ नर्स सेवा देगी। वह अपने समुदाय की पहली ऐसी युवती है, जिसने इस मुकाम को हासिल किया है। बालिका का परिवार आज भी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्षरत है। उनके माता-पिता, सुखरानी और सुबोध बिरहोर, स्थानीय बाजार में हड़िया (चावल की शराब) बेचकर महीने में बमुश्किल 500 रुपये कमा पाते हैं। ऐसी आर्थिक तंगहाली के बीच पहली पीढ़ी की शिक्षार्थी के रूप में बालिका ने पढ़ाई जारी रखी। टाटा स्टील फाउंडेशन की सहायता से उन्होंने चाईबासा और चक्रधरपुर के प्रतिष्ठित स्कूलों से...
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