बिना सभी कानूनी विकल्पों के केस दर्ज का आदेश उचित नहीं
नई दिल्ली, मई 4 -- सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि हाईकोर्ट, याचिकाकर्ता के कानून में दिए गए कानूनी विकल्पों को पूरी तरह इस्तेमाल किए बिना, राज्य के अधिकारियों को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश नहीं दे सकते। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट किसी रिट याचिका पर सुनवाई करने के लिए सिर्फ इसलिए बाध्य नहीं हैं कि किसी कानूनी प्राधिकरण के खिलाफ कथित निष्क्रियता या लापरवाही का मामला बनता है। पीठ ने कहा कि यद्यपि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों का क्षेत्राधिकार व्यापक है, लेकिन ऐसा क्षेत्राधिकार असाधारण, विवेकाधीन और कुछ स्व-लगाए गए प्रतिबंधों के अधीन है। अनुच्छेद-226 हाईकोर्ट की कुछ रिट जारी करने की शक्ति से संबंधित है। उपरोक्त कानून की व्याख्या को ध्यान में रखते हुए, हम पाते हैं कि जब समान रूप...
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