बिना वेतन फिर शुरू हुआ राजकीय छऊ प्रशिक्षण, कलाकारों ने संभाली विरासत बचाने की जिम्मेदारी
सराईकेला, जुलाई 5 -- सरायकेला। विश्व प्रसिद्ध सरायकेला छऊ नृत्य की परंपरा को जीवित रखने के लिए स्थानीय कलाकारों ने दो वर्ष से बंद पड़े प्रशिक्षण को अपने प्रयासों से फिर शुरू कर दिया है। सरकारी स्तर पर निदेशक की नियुक्ति नहीं होने के बावजूद कलाकार बिना किसी वेतन के नई पीढ़ी को छऊ की शिक्षा दे रहे हैं।कलाकारों ने बताया कि लंबे समय से प्रशासनिक उदासीनता के कारण प्रशिक्षण बाधित था, लेकिन विरासत को बचाने के उद्देश्य से उन्होंने स्वयं पहल की। तमाम अभावों के बावजूद अप्रैल में छऊ महोत्सव का सफल आयोजन भी किया गया।रविवार से गुरु बजेंद्र पट्टनायक, शशांक शेखर महांती और अवैतनिक समन्वयक सुदीप कवि ने विधिवत प्रशिक्षण शुरू कर दिया। कलाकारों का कहना है कि सरकारी सहयोग मिले या नहीं, सरायकेला की इस प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर को विलुप्त नहीं होने दिया जाएगा।
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