बिना लिखित आधार बताए गिरफ्तारी संवैधानिक अधिकारों का हननः कोर्ट
नई दिल्ली, जुलाई 11 -- नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। पटियाला हाउस कोर्ट ने कस्टम से जुड़े एक मामले में कानून व्यवस्था को लेकर फैसला सुनाया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अरिदमन सिंह चीमा की अदालत ने स्पष्ट कहा है कि किसी भी आरोपी को गिरफ्तार करते समय उसके परिजनों को लिखित में गिरफ्तारी का आधार न देना उसके संवैधानिक अधिकारों का हनन है। कोर्ट ने कस्टम विभाग की लापरवाही को आधार मानते हुए सवा चार करोड़ रुपये की लग्जरी घड़ी बिना घोषणा और सीमा शुल्क चुकाए भारत लाने के आरोपी मयंक बागानी को तुरंत हिरासत से रिहा करने का आदेश दे दिया। मामले के मुताबिक, आरोपी मयंक सिंगापुर से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचा था। एयरपोर्ट पर जब वह ग्रीन चैनल पार कर रहा था, तभी कस्टम अधिकारियों ने उसे संदेह के आधार पर रोक लिया। तलाशी के...
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