प्रयागराज, मई 4 -- Allahabad Highcourt: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बांदा परिवार न्यायलय द्वारा एक ऐसे कानून के तहत तलाक की डिक्री दिए जाने जो अस्तित्व में ही नहीं है पर कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि परिवार न्यायालय ने ऐसे कानून के तहत तलाक का आदेश दिया, जिसका अस्तित्व ही नहीं है। हाईकोर्ट ने संबंधित न्यायिक अधिकारी के फैसले को अत्यंत लापरवाह और अनौपचारिक बताते हुए उनकी कार्यप्रणाली पर नाराज़गी जताई है। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने यह आदेश पति हाफीज की अपील पर पारित किया, जिसने जनवरी 2026 में फैमिली कोर्ट द्वारा पत्नी को दिए गए तलाक आदेश को चुनौती दी थी। मामले में पत्नी ने अपनी याचिका मुस्लिम स्त्री विवाह विच्छेद अधिनियम, 1986 के तहत दायर की थी जबकि ऐसा कोई कानून अस्तित्व में ही नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि...