लखनऊ, अगस्त 24 -- खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई खाद्य निर्माता वैज्ञानिक आधार के बिना अपने उत्पाद के पैकेजिंग पर सौ प्रतिशत प्योर, नाइसर, ऑर्गेनिक या आयुर्वेदिक जैसे भ्रामक दावे करता है, तो इसे मिस-ब्रांडिंग का अपराध माना जाएगा। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर संबंधित कारोबारी के खिलाफ अदालत में मुकदमा दर्ज होगा और तीन लाख रुपये तक के जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, भ्रामक प्रचार करने पर 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। सोमवार को सिंधु नगर (कृष्णा नगर) स्थित एक रेस्टोरेंट में आयोजित खाद्य सुरक्षा प्रशिक्षण और प्रमाणन (एफओएसटीएसी) के तहत एडवांस ट्रेनिंग फॉर मैन्युफैक्चरर कार्यक्रम में सहायक आयुक्त (खाद्य)-द्वितीय विजय प्रताप सिंह ने खाद्य निर्माण इकाइयों के प्रतिनिधियों को खाद्य...