नई दिल्ली, मार्च 15 -- रसोई गैस को लेकर मचे हाहाकार और उससे जुड़ी परेशानियों को लेकर प्रशासन की तरफ से दोहरी बात क्यों कही जा रही है? एक ओर, दावा किया जाता है कि देश में गैस-तेल की कोई कमी नहीं, वहीं दूसरी ओर, गैस बुकिंग को लेकर गांव में 45 दिन और शहरों में 25 दिन निर्धारित कर दिए जाते हैं। ऐसे में, जनता आखिर क्या करे? जब बुकिंग की हालत पूर्व जैसी होती, तो शायद अभी जो गैस को लेकर हाहाकार मचा हुआ है, वह नहीं मचता। अगर यह दावा सच है कि गैस-तेल की किल्लत नहीं है, तो फिर गैस बुकिंग के नियमों में बदलाव क्यों किया गया है? बिना आग के तो धुआं नहीं उठता। लोगों में उलझन और चिंता इन्हीं वजहों से अधिक है। स्थिति को पहले की भांति करने के लिए सरकार लोगों में भरोसा पैदा करे। इसके लिए उनको सबसे पहले सच बताना चाहिए। शैलबाला कुमारी, गृहिणी पश्चिम एशिया में...