नई दिल्ली, जून 22 -- सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले और लेबर कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक कर्मचारी को बकाया वेतन के साथ काम पर वापस रखने को कहा गया था। कोर्ट ने कहा कि जो कर्मचारी बिना इजाजत के काम से गैर-हाजिर रहा और अपने दावों को साबित नहीं कर पाया, उसे ऐसी राहत नहीं दी जा सकती। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मेसर्स रिफिलिस इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड की अपील को मंजूरी दी और कर्मचारी अर्जुन गुप्ता के दावे को खारिज कर दिया। गुप्ता का आरोप था कि जून 2012 में ड्यूटी पर लौटने की कोशिश करने के बाद उन्हें गैर-कानूनी तरीके से नौकरी से निकाल दिया गया था। यह भी पढ़ें- पीड़ित को 10 लाख मुआवजा देने के आदेश पर रोक यह विवाद तब शुरू हुआ जब अगस्त 2006 से मोल्डर के तौर पर काम कर रहे कर्मचारी ने 14 मई 2012 ...