नई दिल्ली, मार्च 25 -- सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक अहम फैसले में निजी इस्तेमाल वाले बिजली संयंत्रों को दी गई बिजली शुल्क छूट वापस लेने या संशोधित करने के महाराष्ट्र सरकार के अधिकार को बरकरार रखा। शीर्ष अदालत ने हालांकि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड सहित उद्योगों को 'अचानक नीतिगत उलटफेर' से सुरक्षा प्रदान की और ऐसी छूटों के प्रभावी होने से पहले एक वर्ष की नोटिस अवधि अनिवार्य कर दी।न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने हाईकोर्ट के उन पूर्व आदेशों को रद्द कर दिया, जिनमें राज्य सरकार द्वारा निजी इस्तेमाल वाले बिजली संयंत्रों के उत्पादन पर कर लगाने के कदम को खारिज कर दिया गया था। पीठ ने कहा कि पांच अक्तूबर, 2009 और सात नवंबर, 2009 के फैसले व आदेश रद्द किए जाते हैं। हम (विद्युत) अधिनियम की धारा पांच ए के तहत दी गई छूट व...
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