लखनऊ, अप्रैल 9 -- लखनऊ, विशेष संवाददाता। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने निजीकरण के उड़ीसा मॉडल के आधार पर पॉवर कॉरपोरेशन की निजीकरण की नीतियों पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय तत्काल निरस्त किया जाए।समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि जून 2020 में उड़ीसा की विद्युत वितरण कंपनियों का संचालन टाटा पावर को सौंपा गया। इसके बाद पिछले पांच वर्षों में उड़ीसा सरकार द्वारा टाटा पावर को लगभग 7200 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी गई, जिसमें पहले 5400 करोड़ रुपये और बाद में 1800 करोड़ रुपये शामिल हैं। इसके अतिरिक्त स्मार्ट मीटरिंग के लिए लगभग 900 करोड़ रुपये भी उड़ीसा सरकार द्वारा ही प्रदान किए गए, जबकि बिजली खरीद क...