सोनभद्र, मार्च 30 -- अनपरा,संवाददाता। मध्य पूर्व में युद्ध के हालात लम्बे समय तक बने रहे तो इसका असर ऊर्जांचल के बिजलीघरों के उत्पादन पर भी पड़ सकता है। इसका कारण यह है कि कोयले से बिजली बनाने वाले लगभग 12 हजार मेगावाट क्षमता के इन बिजलीघरों तक कोयला एमजीआर(मेरी-गो-राउण्ड) व्यवस्था से पहुंचता है जो पूरी तरह डीजल लोको पर निर्भर है। डीजल की किल्लत हुई तो बिजली घरों को एमजीआर के माध्यम से प्रति माह हो रही लगभग 04 मिलियन टन कोयला आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित होगी जिसका असर भीषण गर्मी में बिजली उत्पादन पर पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त सड़क के माध्यम से भी लगभग 1.60 मिलियन टन कोयला आरसीआर व अन्य माध्यम से प्रेषित होता है वह भी प्रभावित हो सकता है। बिजली घर प्रबन्धन का कहना है कि अभी फिलहाल बिजलीघरों में पर्याप्त डीजल स्टॉक है। आयॅल फायरिंग के लिए भी ...