दुमका, जून 6 -- जरमुंडी, प्रतिनिधि। बासुकीनाथ में आयोजित श्रीराम कथा के प्रथम दिन कथाव्यास शांतनु महाराज ने कहा कि रामायण कल्पबृक्ष के समान है इसको जानने, सुनने व मनन करने वाला जो चाहता है वो उसको मिलता है। शर्त ये है कि इसे निर्मल मन से सुना व गाया जाय। भगवान शिव के विवाह की कथा सुनाते हुए रामकथा में शिव और पार्वती की कथा है।

भगवान शिव की बारात उन्होंने भगवान शिव की बारात की व्याख्या करते हुए कहा कि उनकी बारात में भूत प्रेत भी शामिल थे, परंतु वे भी बहुत ही संयमित थे, लेकिन आज की क्या स्थिति है। हम सब को इस पर विचार करना चाहिए। इस क्रम में कथा की शुरुआत में उन्होंने रामायण की महिमा, राम नाम के महत्व पर चर्चा की। मंगलाचरण, रामायण वंदना और राम नाम की महिमा के व्याख्यान के साथ कथा का शुभारंभ किया गया।

धर्म और भक्ति का मार्ग उन्होंने बताया ...