नई दिल्ली, अक्टूबर 27 -- केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह बाल पोर्नोग्राफी की समस्या और वयस्कों से जुड़े बिना सहमति वाले अश्लील कंटेंट के प्रसार से निपटने के लिए एक नीतिगत ढांचे पर विचार कर रही है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ को बताया कि इस विधेयक में मध्यस्थों पर जिम्मेदारी तय करने का प्रावधान हो सकता है। इसके तहत, उन्हें न केवल आपत्तिजनक कंटेंट हटाना होगा, बल्कि ऐसा कंटेंट अपलोड होने की जानकारी भी संबंधित अधिकारियों को देनी होगी। उन्होंने शीर्ष अदालत को बताया कि इस नीतिगत ढांचे में केवल पीड़ित व्यक्ति ही नहीं, बल्कि तीसरे पक्ष द्वारा की गई वास्तविक शिकायतों पर भी विचार करने का प्रावधान हो सकता है। यह भी पढ़...