बालिगों की शादी की जांच करना पुलिस का काम नहीं, हाईकोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी
प्रयागराज, जुलाई 28 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए स्पष्ट कहा है कि दो बालिग व्यक्तियों द्वारा अपनी इच्छा से किए गए विवाह की जांच करना पुलिस का काम नहीं है। पुलिस का दायित्व अपराधों की जांच करना है, न कि वयस्कों के वैवाहिक जीवन में दखल देना। कोर्ट ने कहा कि किसी बालिग व्यक्ति को अपनी पसंद के साथी से विवाह करने और उसके साथ रहने की स्वतंत्रता संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकार का हिस्सा है। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने सौंभागिनी शुक्ला और उनके पति प्रवि गुप्ता की याचिका स्वीकार करते हुए भदोही के सुरियावां थाने में दर्ज अपहरण संबंधी एफआईआर को रद्द कर दिया। याचिका में कहा गया था कि दोनों बालिग हैं, पिछले एक वर्ष से संबंध में थे और 18 फरवरी 2026 को प्रयागराज स्थित आर्य वैदिक सभा में...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.