बारूद से छलनी जमीन में जान फूंकने वाली घास
दिल्ली, जुलाई 1 -- युद्ध से छलनी हो चुकी जमीन पर फिर से अन्न कैसे उगाया जा सकता है? पूर्वी एशिया की एक घास, यूरोप और यूक्रेन को इसका रास्ता दिखा रही है.चेक गणराज्य की यान इवांगेलिस्ता पुर्केनिया यूनिवर्सिटी (UJEP) ने एक रिसर्च फील्ड को पेट्रोलियम तेल, बारूद, राख और धातुओं के जले टुकड़ों से भरा है.असल में यह फील्ड एक खुली प्रयोगशाला है.पुरानी कोयला खदान में बनाई इस ओपन लैब में एक छोटे से खेत को युद्धभूमि की जमीन के बराबर प्रदूषित किया गया है.UJEP के पर्यावरण विज्ञानी जोसेफ त्रोगल कहते हैं, "लक्ष्य है इस दूषित जगह को फिर से पुर्नजीवित करना, वो भी बायोमास पैदा करते हुए"खेत में पूर्वी एशिया की एक सदाबहार घास, जायंट मिसकैनथस उगाई गई है.चार मीटर (13 फीट) की ऊंचाई तक जाने वाली इस घास की उम्र काफी लंबी होती है.वैज्ञानिकों को लगता है कि जायंट मिसक...
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