रांची, फरवरी 26 -- रांची, संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में बायो मेडिकल कचरा प्रबंधन को लेकर 2012 से लंबित जनहित याचिका का निपटारा करते हुए गुरुवार को सख्त और विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि बायो मेडिकल वेस्ट का वैज्ञानिक निस्तारण न होना जनस्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है। यह संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार से जुड़ा विषय है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने माना कि अब राज्य में बुनियादी संस्थागत ढांचा तैयार हो चुका है, इसलिए प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित वैधानिक प्राधिकारियों की है। हालांकि, भविष्य में लापरवाही न हो, इसके लिए कोर्ट ने समन्वय और अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु विस्तृत गाइडलाइन जारी की।
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