नई दिल्ली, दिसम्बर 6 -- संविधान की प्रस्तावना से 'समाजवादी' और 'पंथ निरपेक्ष' इन दो शब्दों को निकालने को लेकर आज भी बहस होती रहती है। यह बहस कोई नई नहीं है। संविधान निर्माण के समय जब केटी शाह ने आर्टिकल 1 में इन दोनों शब्दों को शामिल करने के लिए प्रस्ताव पेश किया था तो इसपर चर्चा के दौरान डॉ. भीमराव आंबेडकर ने इसका विरोध किया था। बाद में यह संशोधन प्रस्ताव खारिज हो गया था। केटी शाह ने 15 नवंहर 1948 को प्रस्ताव पेश किया था कि भारत एक पंथ निरपेक्ष, संघ और समाजवादी राज्यों का संघ होगा। वह चाहते थे कि आर्टिकल 1 में समाजवादी, संघीय और पंथ निरपेक्ष शब्दों को जोड़ा जाए। उनका तर्क था कि देश में जिस तरह से जाति, धर्म और नस्ल के आधार पर भेदभाव हुआ है वह आगे भी हो सकता है और इसलिए आर्टिकल 1 में ही पंथ निरपेक्ष शब्द शामिल करना जरूरी है। उनका कहना था ...
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