बाढ़ से हर साल 110 गांव होते हैं प्रभावित, दो दर्जन गांव बन जाते हैं टापू
श्रावस्ती, जुलाई 26 -- जमुनहा,संवाददाता। मानसून की पहली बारिश के साथ ही राप्ती नदी के किनारे बसे गांवों में एक बार फिर डर लौट आया है। यह भी पढ़ें- सरयू में उफान की आहट से उड़ा हजारों का चैन, प्रशासन सतर्कगांवों में तैयारियां आसमान में उमड़ते बादल और नदी के बढ़ते जलस्तर को देखकर लोगों की धड़कनें तेज हो जाती हैं। गांवों में अभी बाढ़ का पानी नहीं पहुंचा है, लेकिन लोगों ने पहले ही अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। कहीं अनाज की बोरियां मचान पर रखी जा रही हैं, तो कहीं जरूरी दस्तावेज प्लास्टिक में लपेटकर सुरक्षित किए जा रहे हैं। कई परिवार बच्चों और बुजुर्गों को रिश्तेदारों के यहां भेजने की योजना बना रहे हैं। ग्रामीणों के लिए बाढ़ अब प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि हर साल लौटने वाली ऐसी त्रासदी बन चुकी है, जिसका इंतजार मजबूरी में करना पड़ता है। यह भ...
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