कुशीनगर, अक्टूबर 7 -- कुशीनगर, मिथिलेश द्विवेदी। बाढ़ की विभीषिका के बीच प्रभावित गांवों में इंसानियत की मिसाल भी देखने को मिल रही है। सरकारी अमले, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवकों की ओर से जरूरतमंद परिवारों तक भोजन, राशन और राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। लेकिन बाढ़ प्रभावित गांवों में बेजुबान मवेशियों की पीड़ा बड़ी चुनौती बनती जा रही है। एपी तटबंध टूटने के बाद प्रभावित गांवों में बड़ी संख्या में पशुओं के सामने भूसा और हरे चारे का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों के अनुसार घरों में रखा भूसा पानी में भीगकर सड़ने लगा है। कई स्थानों पर तेज बहाव में भूसा बह भी गया। वहीं खेतों में पानी भरा होने के कारण हरा चारा और घास उपलब्ध नहीं हो पा रही है।

मवेशियों की चिंता बाढ़ पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि इंसानों के लिए किसी न किसी स्तर प...