मुंगेर, अप्रैल 16 -- मुंगेर, निज प्रतिनिधि। जिले में तिलहन की खेती संभावनाओं से भरी है, पर बाजार और सरकारी सहयोग के अभाव में उत्पादन पिछड़ रहा है। किसान मानते हैं कि सही नीति और सहायता मिले तो मुंगेर तिलहन के मामले में आत्मनिर्भर बन सकता है। --पिछले वर्षों में बढ़ा सरसों का रकबा, मिट्टी-जलवायु अनुकूल:पिछले 4-5 वर्षों से जिले में सरसों की खेती का रकबा लगातार बढ़ रहा है। कृषि विभाग के आंकड़े बताते हैं कि पहले जहां 2 हजार हेक्टेयर में सरसों लगती थी, अब यह बढ़कर 5 हजार हेक्टेयर के पार पहुंच गई है। जलवायु और मिट्टी की अनुकूलता के कारण सरसों किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है। यह भी पढ़ें- पूर्णिया में दो हजार हेक्टेयर में तेलहन की खेती धान-गेहूं के मुकाबले कम लागत में तिलहन अधिक मुनाफा देने वाली फसल बन रही है।---किसान बोले: समर्थन मिले तो होगा ...
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