नई दिल्ली, मार्च 7 -- कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक बांग्लादेशी कैदी की तत्काल रिहाई और स्वदेश वापसी का आदेश दिया है, जिसे भारत में अवैध रूप से प्रवेश करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और वह पिछले 21 वर्षों से जेल में बंद है। अदालत ने कहा कि किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम के तहत किसी किशोर पर लगाई जा सकने वाली अधिकतम सजा सात साल है। न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ ने हाल ही में आदेश दिया कि अब 36 साल के हो चुके उस व्यक्ति को तत्काल रिहा किया जाए। फरवरी 2005 में गिरफ्तारी के बाद से वह 21 साल से अधिक समय से हिरासत में है। अपीलकर्ता के नाबालिग होने के संबंध में की गई पड़ताल के बाद, उत्तर 24 परगना जिले के बसीरहाट स्थित अतिरिक्त जिला एवं सेशन जज ने खंडपीठ के समक्ष एक रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसमें कहा गया कि अप...
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