हिन्दुस्तान ब्यूरो, अगस्त 4 -- बिहार की सियासत के लिहाज से अहम मानी जाने वाली बांकीपुर सीट पर भाजपा की हार उसके लिए बड़ा झटका है। यह सीट 31 साल से भाजपा के कब्जे में रही थी। इसलिए इसे भाजपा का अभेद्य गढ़ भी मान लिया गया था। इस लिहाज से बांकीपुर की पराजय सिर्फ एक सीट के उपचुनाव की हार नहीं है।विशुद्ध रूप से शहरी क्षेत्र वाले इस विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं ने पार्टी को दो टूक संदेश दिया है कि अब जातीय समीकरण मतदान का आधार नहीं रहा। उसे जमीन पर काम, जवाबदेही और बेहतर नेतृत्व चाहिए। इस चुनाव परिणाम ने यह भी बता दिया है कि भाजपा के लिए आत्ममंथन और रणनीति बदलने का समय है। 2008 में हुए परिसीमन के बाद बांकीपुर सीट अस्तित्व में आया था। इसके पहले यह पटना पश्चिम के नाम से जाना जाता था। वर्ष 1995 में पहली बार नवीन किशोर सिन्हा भाजपा के टिकट पर यहां ...