बांका, मार्च 17 -- बांका, निज संवाददाता। पवित्र महीने रमजान के अंतिम दिनों में जिले भर में इबादत,रोजा और दान-पुण्य यानी जकात और फितरा का माहौल चरम पर है। मुस्लिम समुदाय के लोग पूरे समर्पण के साथ अल्लाह की इबादत कर रहे हैं। मान्यता है कि रमजान के 27वें रोजे के रात्रि में ही कुरान शरीफ का धरती पर अवतरण हुआ था,जिसमें इंसानियत,रहमत और भाईचारे का संदेश निहित है। रमजान के दौरान जकात और फितरा देना इस्लाम में अहम जिम्मेदारी मानी जाती है। लोग अपनी कमाई का एक हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों के बीच बांटकर सामाजिक समरसता का उदाहरण पेश करते हैं। कपड़े, खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी सामान का दान भी बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। दिनभर रोजेदार संयम और अनुशासन के साथ बिना कुछ खाए-पिए रहते हैं और शाम को इफ्तार के साथ रोजा खोलते हैं। इस दौरान पांच वक्त की नमाज अ...