बांका में इतिहास की आखिरी आवाज: अंग्रेजों से लड़े कमलेश्वरी अब जिंदगी की जंग में
बांका, अगस्त 13 -- बांका, निज प्रतिनिधि। जिन लोगों ने अपनी आंखों से गुलामी का दौर देखा, अंग्रेजों का दमन सहा और देश को आजाद कराने के लिए जेल की यातनाएं झेलीं, उनकी संख्या अब तेजी से सिमटती जा रही है। बांका जिले में जंगे आजादी की दास्तान सुनाने वाले अब महज एक स्वतंत्रता सेनानी बचे हैं। बाराहाट प्रखंड के मिर्जापुर गांव निवासी स्वतंत्रता सेनानी कमलेश्वरी चौधरी की उम्र अब 109 वर्ष से अधिक हो चुकी है। उम्र के इस पड़ाव पर उनकी सांसें भी धीरे-धीरे थकने लगी हैं। ऐसे में आने वाली पीढ़ी शायद ही कभी आजादी की वह कहानी प्रत्यक्ष रूप से किसी स्वतंत्रता सेनानी की जुबानी सुन सकेगी। यह भी पढ़ें- सुपौल : आजादी की लड़ाई में फिरंगियों से लोहा लेने में आगे रहे कोसी के रणबांकुरेस्वतंत्रता संग्राम का इतिहास जिले के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में 600 से अधिक स...
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