बर्खास्तगी रद्द होने पर कर्मचारी को मिलेगा पूरा बकाया वेतन
रांची, जुलाई 17 -- रांची, विशेष संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने एक फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी की बर्खास्तगी अदालत से रद्द की जाती है और नियोक्ता उसके खिलाफ दोबारा विभागीय कार्रवाई पूरी नहीं करता तो उस कर्मी पर नो वर्क, नो पे का सिद्धांत लागू नहीं होगा। कोर्ट ने कहा कि जब कर्मचारी को काम से दूर रखने के लिए स्वयं नियोक्ता जिम्मेदार हो, तब उसे वेतन व अन्य सेवा लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने बैजनाथ महतो की याचिका पर सुनवाई करते हुए सीसीएल के 24 दिसंबर 2014 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उन्हें बकाया वेतन देने से इनकार किया गया था।
बैजनाथ महतो का मामला बैजनाथ को 1981 में विस्थापित के रूप में सीसीएल में नौकरी मिली थी। 1989 में उन पर चोरी का मामला दर्ज होने के बाद निलंबित कर बाद में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया...
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