नई दिल्ली, जून 11 -- सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि एक अनुशासनात्मक प्राधिकारी को नौकरी से बर्खास्तगी जैसी कड़ी सजा देने से पहले बहुत सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि इसका न केवल बर्खास्त कर्मचारी पर बल्कि उनके आश्रित परिवार के सदस्यों पर भी बुरा असर पड़ता है। न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन कोटिस्वर सिंह की पीठ ने यह टिप्पणियां उस महिला द्वारा दायर अपील पर कीं, जो महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड में कार्यरत थी और सेवा से बर्खास्त कर दी गई थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि सेवा से बर्खास्तगी उन मामलों के लिए ही रहनी चाहिए जहां कदाचार सबसे गंभीर प्रकृति का है और जहां सहानुभूतिपूर्ण या नरम रवैया अपनाना अनुचित और अनुपयुक्त हो। शीर्ष अदालत ने कहा कि भ्रष्टाचार, गबन, नियोक्ता को भारी नुकसान पहुंचाने वाले कृत्य या निरंतर सेवा के लिए...