हरिद्वार, अप्रैल 26 -- उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के पक्षी वैज्ञानिक डॉ. विनय सेठी ने कहा कि नर गौरैया जीवनभर एक ही मादा के साथ रहकर घोंसला निर्माण से लेकर बच्चों के पालन-पोषण तक हर जिम्मेदारी निभाता है। वे बहादराबाद स्थित पैनासोनिक कंपनी के एंकर स्किल स्कूल की ओर से आयोजित गौरैया संरक्षण जागरूकता सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हजारों वर्षों से मानव के निकट रहने वाला यह पक्षी आज अस्तित्व संकट से जूझ रहा है। आधुनिक भवन संरचनाओं और बदलते शहरी परिवेश के कारण इसके प्राकृतिक आवास तेजी से समाप्त हो रहे हैं। डॉ. सेठी ने पावरपॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से गौरैया के जीवन चक्र और व्यवहार पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सुरक्षित घोंसलों की कमी इसकी घटती संख्या का प्रमुख कारण है। लकड़ी के कृत्रिम घोंसले लगाकर ...