किशनगंज, अप्रैल 2 -- किशनगंज। बदलते मौसम के साथ तापमान में उतार-चढ़ाव, ठंडी हवाएं और वातावरण में बढ़ती धूल बच्चों की सेहत के लिये गंभीर चुनौती बनती जा रही है। विशेषकर पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में निमोनिया का खतरा इस मौसम में कई गुना बढ़ जाता है। यह बीमारी सामान्य सर्दी-खांसी से शुरू होकर धीरे-धीरे फेफड़ों को संक्रमित कर देती है, जो समय पर उपचार नहीं मिलने पर जानलेवा भी साबित हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, निमोनिया आज भी बच्चों की मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल है, इसलिए इसकी समय पर पहचान और उपचार बेहद आवश्यक है। लक्षण दिखते ही उपचार में देरी न करेंसिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि निमोनिया के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। उन्होंने कहा कि जब बच्चे को लगातार खांसी, बुखार, सांस लेने में कठिना...