बतकही में घाट से मिजाज तक के खींचे शब्दचित्र
वाराणसी, अगस्त 12 -- वाराणसी। अंतरराष्ट्रीय काशी घाट वॉक विश्वविद्यालय की ओर से 'काशी चक्रचक्र' परम बनारसी बतकही का आयोजन बुधवार को नदेसर स्थित होटल ताज़ में हुआ। इसमें काशी की जीवंत परम्पराओं, कला, संस्कृति, लोक स्मृतियों और बनारसी मिजाज की आत्मीयता छलकी। एक प्रकार से यह काशिका संपदा के सृजनशील रचनाकारों, कला प्रेमियों के आत्मीय मिलन का अवसर भी था। विशिष्ट वक्ता के रूप में प्रख्यात संगीताचार्य पद्मश्री डॉ.राजेश्वर आचार्य ने काशिका शैली में बनारस की मस्ती भरी जीवनशैली, फक्कड़पन के दर्शन और जीवंतताओं के अद्भुत शब्द चित्र खींचे। उन्होंने काशी के साहित्यिकों तथा संगीतकारों की साधना के कई संस्मरण सुनाए। परिवर्तन के इस दौर में परंपराओं के संरक्षण का आग्रह किया।
कला और संस्कृति का जश्न पक्का महाल की संस्कृति के बारे में पं.ज्योतिशंकर त्रिपाठी न...
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