लखीसराय, अप्रैल 18 -- लखीसराय, कार्यालय संवाददाता। जिले में खेती-किसानी का स्वरूप पिछले एक दशक में तेजी से बदला है। आधुनिक कृषि उपकरणों और तकनीकों की पहुंच तो बढ़ी है, लेकिन इसके साथ ही खेती की लागत में भी भारी इजाफा हुआ है। किसानों का कहना है कि जितनी तेजी से खर्च बढ़ा है, उस अनुपात में फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ता जा रहा है। ळया और सूर्यगढ़ा प्रखंड के किसानों से बातचीत में सामने आया कि पहले जहां परंपरागत खेती कम लागत में हो जाती थी, अब बीज, खाद, कीटनाशक और सिंचाई पर खर्च कई गुना बढ़ गया है। यह भी पढ़ें- हर साल 10 फीसद बढ़ जाती है लागत पर उस अनुपात में कीमत नहीं मिलती बड़हिया के किसान रामानंद सिंह बताते हैं कि पहले एक बीघा धान की खेती में जहां 1500 से 2000 रुपये तक खर्च आता था, वहीं अब यह ल...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.