नई दिल्ली, जुलाई 20 -- नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ने से वैश्विक बाजार में चिंता बढ़ गई है। मार्च के बाद अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष फिर तेज हो गया है। इसका असर अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कच्चे तेल की कीमतों पर साफ दिखाई देने लगा है। भारत के लिहाज से देखा जाए तो अगर संघर्ष लंबा चलने पर पेट्रोलियम उत्पादों के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे घरेलू स्तर पर महंगाई बढ़ेगा। उधर, भारत के लिए आयात-निर्यात करना महंगा होता जा रहा है। युद्ध के बीच सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत करीब 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तनाव लंबे समय तक बना रहा तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। तनाव के कारण दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य से ...