नई दिल्ली, जुलाई 20 -- नई दिल्ली। नीट पेपर लीक की कोख से उपजा आंदोलन, सोनम वांगचुक के अनशन से सहानुभूति बटोरने में सफल रहा और अब सोमवार को संसद मार्च में बड़ी संख्या में सड़कों पर छात्र उतरे तो बड़ी संख्या में आई स्वतः स्फूर्त भीड़ ने राजनीतिक दलों को भी चौंकाने का काम किया। यही वजह है कि संसद में छात्रों की आवाज उठाने की होड़ दिखी। अब बड़ा सवाल है कि क्या यह आंदोलन सही दिशा और एजेंडे को व्यापक बनाकर अपना वांछित लक्ष्य हासिल कर पाएगा。 यह भी पढ़ें- आंदोलन का समर्थन करते-करते सीजेपी के सबसे करीब पहुंच गई आफ महत्वपूर्ण प्रदर्शन फिलहाल छात्रों का संसद मार्च कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस प्रदर्शन की खास बात यह रही कि इसमें बड़ी संख्या में ऐसे युवा शामिल हुए, जो किसी स्थापित राजनीतिक दल या पारंपरिक छात्र संगठन के बैनर से नहीं जुड़...