बज्जिका कवियों को मंच देगी साकल्य पत्रिका
मुजफ्फरपुर, जून 14 -- मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। साहित्य धूप तले की छांव है। साहित्य की साधना ब्रह्म की साधना है। जो समाज साहित्य से हीन हो जाता है, उसकी भूमिका समाज में पर कटे पक्षी की तरह हो जाती है। ये बातें रविवार को जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन की बैठक में उदय नारायण सिंह ने कहीं।चित्तरंजन सिन्हा कनक ने कहा कि जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के द्वारा 'साकल्य' पत्रिका का प्रकाशन जिले के साहित्यकारों खासकर बज्जिका कवियों को मंच देगा। साकल्य का प्रकाशन जल्द होगा। डॉ. विनोद कुमार सिन्हा, प्रियंवदा दास ने कहा कि यह साकल्य केवल नाम का साकल्य नहीं है, बल्कि यह साहित्यिक साकल्य अपने नाम के अनुरूप शुद्ध-बुद्ध एवं श्रेष्ठ है। डॉ. लोकनाथ मिश्र व डॉ. हरिकिशोर प्रसाद सिंह ने कहा कि साकल्य के साथ मुजफ्फरपुर के कीर्तिशेष साहित्यकारों की कृति भी पुस्तक...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.