नई दिल्ली, मई 10 -- नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। राजधानी में बच्चों की सुरक्षा को लेकर अदालत ने गहरी चिंता जाहिर की है। तीस हजारी अदालत ने 11 साल की बच्ची से यौन उत्पीड़न के दोषी को सजा सुनाते हुए कहा कि आज हालात ऐसे हो गए हैं कि बच्चे घर के बाहर सुरक्षित नहीं हैं। यह दर्शाता है कि हम एक समाज के रूप में अपनी आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित माहौल देने में पूरी तरह विफल हो रहे हैं। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बबीता पुनिया की अदालत ने मामले में पॉक्सो अधिनियम की धारा 10 और बीएनएस की धारा 74 के तहत दोषी ठहराए गए धर्मेंद्र को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने कहा कि यह केवल एक बच्ची के खिलाफ अपराध नहीं, बल्कि बचपन की गरिमा और समाज के मूल्यों पर गंभीर हमला है। अदालत ने जांच अधिकारी सब-इंस्पेक...