भोपाल, जुलाई 11 -- मध्य प्रदेश में इथेनॉल उत्पादन के नाम पर एक बड़ा घोटाला सामने आया है। सरकारी अफसरों, राइस मिलर्स और इथेनॉल प्लांट संचालकों की मिलीभगत से 1160 करोड़ रुपये का सरकारी चावल इथेनॉल बनाने के बजाय वापस सरकारी गोदामों में ही खपा दिया गया। इस मामले में पुलिस ने एसआईटी का गठन किया है और अब तक 4 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।क्या है पूरा मामला? भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश में इथेनॉल उत्पादन के लिए 5 लाख मीट्रिक टन (50 लाख क्विंटल) सरकारी चावल आवंटित किया गया था। इस चावल की अनुमानित कीमत करीब 1,160 करोड़ रुपये बताई जा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह कोई आम चावल नहीं था, बल्कि यह फोर्टिफाइड यानी पोषण युक्त चावल था। इसे कुपोषण और एनीमिया से बचाने के लिए बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किशोरियों को दिया जाना था।कैसे ...