नई दिल्ली, जून 30 -- महज 23 साल की उम्र में वी श्रीपति देशभर की लाखों बेटियों और महिलाओं के लिए एक शानदार मिसाल बन चुकी है। उनके अटूट हौसले और दृढ़ संकल्प की कहानी सिखाती है कि कैसे लक्ष्य पाने की जिद आपकी तमाम बाधाओं के बीच कामयाबी दिलाती है। उन्होंने बेटी को जन्म देने के महज दो दिन बाद करीब 200 किलोमीटर का सफर तय कर सिविल जज की परीक्षा दी। उनकी इसी जुनून और मेहनत ने उन्हें तमिलनाडु के मलियाली आदिवासी समाज की पहली महिला सिविल जज बना दिया। श्रीपति के संघर्ष की यात्रा साबित करती है कि अगर इंसान के इरादे मजबूत हों, तो गरीबी, भौगोलिक बाधाएं, शादी और यहां तक कि मां बनने की चुनौतियां भी उसे अपने सपनों को पूरा करने से नहीं रोक सकतीं।पहाड़ों और रिजर्व फॉरेस्ट एरिया में बीता बचपन रिपोर्ट्स के मुताबिक, वी. श्रीपति का जन्म तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई...