नई दिल्ली। हेमलता कौशिक, जुलाई 12 -- दिल्ली हाईकोर्ट ने गर्भ से रूबेला सिंड्रोम से पीड़ित बच्चे के पिता को अपना फर्ज निभाने की नसीहत दी। साथ ही यह भी कहा कि 8 साल के हो चुके बच्चे को तत्काल कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी की जरूरत है, इसलिए इलाज का पूरा खर्च पिता ही उठाएगा। जस्टिस रेणु भटनागर और जस्टिस नवीन चावला की डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में कहा कि बच्चे का इलाज दो साल की उम्र से एक निजी संस्थान में चल रहा है। अब पिता यह कहकर उसकी सर्जरी का भार उठाने से इनकार कर रहा है कि सर्जरी एम्स में हो सकती है तो निजी अस्पताल में क्यों कराई जाए। बेंच ने कहा कि पिता आर्थिक रूप से समृद्ध है। इसके बावजूद बच्चे की सर्जरी वहां कराने से इनकार कर रहा है, जहां उसका पिछले छह साल से इलाज चल रहा है। बेंच ने यह भी माना कि बच्चे को जन्मजात बीमारी है। इसके लिए आधुनिक ...
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