नई दिल्ली, मई 15 -- दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में एक युवक को बड़ी राहत देते हुए राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एससीआरबी) को किशोरावस्था के उसके आपराधिक रिकॉर्ड हटाने का निर्देश दिया है। पुराने आपराधिक रिकॉर्ड के कारण युवक का पासपोर्ट जारी नहीं हो पा रहा था। जस्टिस मनोज जैन की बेंच ने कहा कि किशोरों को 'भूल जाने का अधिकार' पूरी तरह प्राप्त है और इससे समझौता नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम की धारा-24 का उद्देश्य नाबालिगों के भविष्य को सुरक्षित रखना है, इसलिए बचपन में हुई गलती को जीवनभर का कलंक नहीं बनाया जा सकता। यह भी पढ़ें- वैवाहिक झगड़े 'जनहित' नहीं, पति की कमाई निजी जानकारी; दिल्ली HC से पत्नी को झटकाक्या था युवक का अपराध युवक ने हाईकोर्ट को बताया कि वर्ष 2000 में, जब वह नाबालिग था, उसके खिलाफ न्यू फ्र...