सराईकेला, फरवरी 26 -- सरायकेला, संवाददाता। छऊ की 'काशी' सरायकेला उपेक्षा में भंवर में फंस गया है। गुरुओं की कमी से मुखौटों के पीछे छिपी मुस्कान फीकी पड़ने लगी है। दुनिया में अपनी लोहा मनवाने वाली सरायकेला छऊ नृत्य शैली आज अपने ही घर में उपेक्षा का शिकार है। राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र, सरायकेला पिछले लंबे समय से बगैर सारथी (निदेशक) के चल रहा है। इससे अंतरराष्ट्रीय पहचान वाली कला के अस्तित्व पर संकट का बादल मंडराने लगा है। हालांकि, झारखंड के हालिया बजट में जिले के सांस्कृतिक उत्थान के लिए कई अहम घोषणाएं की गई हैं, जिसमें कला केंद्र भी शामिल है। इसे सुव्यवस्थित करने के लिए समितियों का पुनर्गठन किया जाएगा। निदेशक के बिना केंद्र, बदहाली का शिकार एक ओर सरकारी कागजों में छऊ कला के सुनहरे दिन लाने की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर सरायकेला स्थित राज...