लखनऊ, दिसम्बर 7 -- बंटवारे के आसपास के वक्त क्या हालात थे और उस दौर में पूरी कौम पर क्या मुश्किलें आयीं, शुएब निजाम का उपन्यास उनकी निशानदेही करता है। साथ ही संदेश देता है कि नयी पीढ़ी की अपनी राजनीतिक भागीदारी बढ़ानी होगी। ये बाते मुख्य अतिथि पूर्व आईएएस डा.अनीस अंसारी ने कहीं। लेखक शुएब निजाम के उपन्यास गर्द-ए-सफर और रेखाचित्र संकलन सर-ए-सय्यारगान-ए-सुख़न पर विचार गोष्ठी का आयोजन उसलूब आर्गनाइजेशन की ओर से प्रेमचंद सभागार हिन्दी संस्थान में किया गया था। अनीस अंसारी ने दोनों उर्दू किताबों के विषयों को केंद्र में रखते हुए डा.अंसारी ने 2022 में हुए सर्वेक्षण का हवाला से कहा कि पसमांदा मुसलमान आज भी सबसे पीछे हैं। आज राजनीतिक चेतना जगाने की जरूरत है। अध्यक्षता कर रहे लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष डा.अनीस अशफाक ने लेखक के रचनात्मक ...
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