नई दिल्ली, मई 4 -- प्रभाकर मणि तिवारी,वरिष्ठ पत्रकार पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस तिहाई तक भी नहीं पहुंच सकेगी, यह शायद ही किसी ने सोचा था। इस चुनाव में 'बदला' बनाम 'बदलाव' का नारा था और जनादेश बता रहा है कि लोगों ने 'बदलाव' को चुना है। चूंकि अब तक ममता बनर्जी अकेली भाजपा से मुकाबला करती नजर आ रही थीं, इसलिए इस मजबूत क्षेत्रीय ताकत के कमजोर पड़ने का असर 2029 के लोकसभा चुनाव पर पड़ना लाजिमी है। भाजपा की इस ऐतिहासिक जीत के संकेत दूरगामी होंगे। पूर्वी भारत में ओडिशा और बंगाल ही दो ऐसे राज्य थे, जहां तमाम कोशिशों के बावजूद पार्टी पैठ नहीं बना पा रही थी, पर उसने पहले ओडिशा का मोर्चा फतह किया और अब बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के मजबूत किले में सेंध लगाते हुए पंद्रह साल से राज कर रही ममता बनर्जी को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। तृणमूल ...